सरस्वती विद्या मंदिर उ.मा. वि. लटेरी

सप्रेम नमस्कार
सरस्वती विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लटेरी की वेबसाइट में स्वागत है ।
पूर्व में विवेक बाल मंदिर के नाम से संचालित यह विद्यालय सरस्वती विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लटेरी के नाम से शहर की एक प्राचीन एवं प्रतिष्ठित संस्था है।
मध्यप्रदेश में प्रथम शिशु मंदिर की स्थापना करने वाले युगपुरूष श्रद्धेय श्री रोशनलाल जी से मीसाबंदी में साथ में जेल में साहचर्य रहे आदरणीय श्री सुरेश अग्रवाल ‘‘भाईजी‘‘ ने 1988 में विद्यालय की नींव रखी थी जो प्रारंभ में प्रथम कक्षा से किराये के भवन में प्रारंभ हुआ था। आज विद्यालय दो भवनों में संचालित है।आपके प्रारंभिक साथी रहे आदरणीय श्री कृष्णमोहन जी शर्मा ‘‘वकील साहब‘‘ जो संघ के स्वयंसेवकों को न केवल प्रोत्साहन प्रदान करते रहे, बल्कि बौद्धिक स्तर पर पाथेय आज भी उपलब्ध करा रहे हैं। इस भव्यतम शिक्षा संस्थान के निर्माण के लिये हम एवं आगे आने वाली पीढ़ियां सदैव आपके पुण्यकार्य को स्मरण रखेंगी।
मनुष्य जीवन पर्यन्त श्रेष्ठतम की खोज में संलग्न रहता है। भैया बहिनों के लिये सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय वस्तुतः एक खोज का स्थान है । शिक्षा की परिभाषा है कि मनुष्य की अंतर्निहित सुप्त प्रतिभाओं को जागरण ही शिक्षा है। शिक्षा के साथ संस्कार हमारा लक्ष्य है। सारे बालकों के प्रतिभाओं के विकास उनकी क्षमता तक पहुँचने और हमारे साथ उनके बिताए समय को खुशहाल बनाना है । हम उच्चतम गुणवत्ता वाले वातावरण एवं प्रयोगों को विद्यालय में प्रदान करने हेतु लगातार परिश्रम करते हैं । एक शिक्षण विद्यालय के रूप में हम वसुधैव कुटुंबकम के साथ श्रेष्ठ शिक्षा को प्रदान करने के लिये प्रतिबद्ध हैंए एवं संगठन के माध्यम से प्रशिक्षण और सतत् मनीषियों के मार्गदर्शन से कार्यरत हैं एवं ऐसा कर हम स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं ।

साल दर साल विद्यालय ने साक्षरता और बुनियादी अंक ज्ञान के क्षेत्र में उपलब्धियों के उच्च स्तर को अर्जित किया है । पठन लेखन और गणित के क्षेत्र में समाज की अपेक्षाओं पर खरा उतरकर बालक विद्यालय छोड़ते हैं । हमारे क्रियाकलाप अनुभवों और अवसरों के एक विस्तृत क्षेत्र को प्रदान करते हुए उत्कृष्ट हैं । बालक विषयक प्रकरणों के माध्यम से उनकी साक्षरताए बुनियादी अंकज्ञान और शारीरिकए संगीतए योगए नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा एवं संस्कृत तथा अंग्रेजी स्पोकन के कौशलों का अनुप्रयोग सीखते हैं ।

हमारे पास शिक्षित विषय के आचार्य दीदी हैं जो पूरे विद्यालय में उच्च श्रेणी की शिक्षा का अध्यापन करते हैं । हमारी विद्यालय पश्चात गतिविधियाँ भी शारीरिक और रचनात्मक अनुभवों के एक विस्तृत क्षेत्र को प्रदान करती हैं ।
वर्तमान पदाधिकारियों में श्री रघुवीर जी शर्मा अध्यक्ष एवं श्री मुकेश जी रघुवंशी सचिव के दायित्व का निर्वाह कर रहे हैं।
धन्यवाद

विद्या भारती

विद्या भारती संगठन
बालक ही हमारी आशाओं का केंद्र है. वही हमारे देश, धर्म एवं संस्कृति का रक्षक है. उसके व्यक्तित्व के विकास में हमारी संस्कृति एवं सभ्यता का विकास निहित है. आज का बालक ही कल का कर्णधार है. बालक का नाता भूमि एवं पूर्वजों से जोड़ना, यह शिक्षा का सीधा, सरल तथा सुस्पस्ट लक्ष्य है. शिक्षा और संस्कार द्वारा हमें बालक का सर्वांगीण विकास करना है.

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हमारा लक्ष्य

हमारा लक्ष्य

हमारा लक्ष्य राष्ट्रीय शिक्षाप्रणाली का विकास करना है ।
राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली का आषय ठीक प्रकार समझने के लिए राष्ट्र की संकल्पना को समझना होगा ।
राष्ट्र – एक प्रकृति सिद्ध भूखण्ड जिसमें निवास करने वाला, उसका पुत्र रुपी समाज, धर्म का आचरण करने वाले सभी ऋषि, मुनि, संत, महंत , मनीषी, महापुरुष एवं उनका अनुशरण करने वाा साधारण समाज इन सभी की युगों -युगों तक विकास की जो प्रक्रिया चली उससे जो जीवन शैैली बनी उसे संस्कृति कहा गया ।

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आधारभूत विषय शिक्षण

बालक के सर्वांगीण विकास हेतु केन्द्रीय पाठ्यक्रम:- राष्ट्रीय एकात्मता एवं बालक के सर्वांगीण विकास की दृष्टि से पांच विषयों के केन्द्रीय पाठ्यक्रम निर्धारित किये गये है ।
(1) शारीरिक शिक्षा
(2) योग  शिक्षा
(3) संगीत  शिक्षा
(4) संस्कृत  शिक्षा
(5) नैतिक एवं आध्यात्मिक  शिक्षा

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